विवाह - व्याकरण

पति एक संज्ञा है,
और बस संज्ञा भर ही है;
तिस पर भी ऐसी कि
जिसका संज्ञान पत्नी नहीं लेती है।
और अगर गलती से यही गलती पति कर दे
तो सर्वनाम (तू तू - मैं मैं) से शुरू कर
क्रियाओं, विशेषणों और क्रिया-विशेषणों तक
समुच्चय और विस्मयादि का
बोध करा कर ही दम लेती है।

२७ नवम्बर २०१७
बंगलौर